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Sampurn Shiv Puran Archiv

261 Episoden
9 Minuten
"नंदीश्वर के जन्म,वरप्राप्ति,अभिषेक और विवाह का वर्णन"
7 Minuten
"नंदीश्वर अवतार का वर्णन"
10 Minuten
"शिवजी द्वारा दसवें से लेकर अठाइसवें योगेश्वरतारों का वर्णन"
8 Minuten
"वाराह कल्प में होने वाले शिव जी के प्रथम अवतार से लेकर नवम ऋषभ अवतार तक का वर्णन"
11 Minuten
"शिवजीके सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान नामक पाँच अवतारोंका वर्णन"
9 Minuten
"शिव जी की अष्टमूर्तियों का तथा अर्धनारीश्वर रूप का सविस्तार वर्णन"
5 Minuten
"विदल और उत्पल नामक दैत्योंका पार्वती पर मोहित होना और पार्वती का कन्दुक प्रहारद्वारा उनका काम तमाम करना, कन्दुकेश्वर की स्थापना और उनकी महिमा"
4 Minuten
"गजासुर की तपस्या, वर-प्राप्ति और उसका अत्याचार, शिव द्वारा उसका वध,उस की प्रार्थना से शिव का उसका चर्म धारण करना और ‘कृत्तिवासा’ नाम से विख्यात होना तथा कृत्तिवासेश्वरलिंग की स्थापना करना"
4 Minuten
"दुन्दुभिनिह्हाद नामक दैत्य का व्याघ्ररूप से शिवभक्त पर आक्रमण करने का विचार और शिव द्वारा उसका वध"
22 Minuten
"बाणासुर की तपस्या और उसे शिव द्वारा वर प्राप्ति, शिव का गणों और पुत्रो सहित उसके नगर में निवास करना, बाणपुत्री उषा का रात के समय स्वप्न में अनिरुद्ध के साथ मिलन, चित्रलेखा द्वारा अनिरुद्ध का द्वारका से अपहरण, बाण का अनिरुद्ध को नागपाश में बांधना , दुर्गा के स्तवन से अनिरुद्ध का बंधन मुक्त होना, नारद द्वारा समाचार पाकर श्री कृष्ण की शोणितपुर पर चढ़ाई, शिव के साथ उनका घोर युद्ध , शिव की आज्ञा से श्री कृष्ण का उन्हें जृम्भणास्त्र से मोहित करके बाण की सेना का संहार"
8 Minuten
"श्रीकृष्ण द्वारा बाण की भुजाओं का काटा जाना, सिर काटने के लिये उद्यत हुए श्रीकृष्ण को शिव का रोकना और उन्हें समझाना, श्रीकृष्ण का परिवार समेत द्वारका को लौट जाना, बाण का ताण्डव नृत्य द्वारा शिव को प्रसन्न करना, शिव द्वारा उसे अन्यान्य वरदानों के साथ महाकालत्व की प्राप्ति"
30 Minuten
नन्दीश्वर द्वारा शुक्राचार्य का अपहरण और शिव द्वारा उनका निगला जाना, सौ वर्ष के बाद शुक्र का शिवलिंग के रास्ते बाहर निकलना, शिव द्वारा उनका ‘शुक्र’ नाम रखा जाना, शुक्र द्वारा जपे गये मृत्युंजय- मन्त्र और शिवाष्टोत्तर-शतनामस्तोत्र का वर्णन, शिव द्वारा अन्धक को वर-प्रदान"
13 Minuten
"शुक्राचार्य की घोर तपस्या और इनका शिवजी को चित्तरल्न अर्पण करना तथा अष्टमूत्त्यष्टक-स्तोत्र द्वारा उनका स्तवन करना, शिवजी का प्रसन्न होकर उन्हें मृत-संजीवनी विद्या तथा अन्यान्य वर प्रदान करना"
10 Minuten
"उमा द्वारा शम्भु के नेत्र मूँद लिये जाने पर अन्धकार में शम्भु के पसीने से अन्धकासुर की उत्पत्ति, हिरण्याक्ष की पुत्रार्थ तपस्या और शिव का उसे पुत्ररूप में अन्धक को देना, हिरण्याक्ष का त्रिलोकी को जीत कर पृथ्वी को रसातल में ले जाना और वराह रूपधारी विष्णु द्वारा उसका वध"
9 Minuten
"हिरण्यकशिपु की तपस्या और ब्रह्मा से वरदान पाकर उसका अत्याचार, नृसिंह द्वारा उसका वध और प्रह्लाद को राज्य-प्राप्ति"