Sampurn Shiv Puran Archiv
261 Episoden
20 Minuten
"भाइयों के उपालम्भ से अन्धक का तप करना और वर पाकर त्रिलोकी को जीत कर स्वेच्छाचार में प्रवृत्त होना, उसके मनत्रियों द्वारा शिव-परिवार का वर्णन, पार्वती के सौन्दर्य पर मोहित होकर अन्धक का वहाँ जाना और नन्दीश्वर के साथ युद्ध, अन्धक के प्रहारसे नन्दीश्वर की मूर्च्छा, पार्वती के आवाहन से देवियों का प्रकट होकर युद्ध करना, शिव का आगमन और युद्ध, शिव द्वारा शुक्राचार्य का निगला जाना, शिव की प्रेरणा से विष्णु का काली-रूप धारण कर के दानवों के रक्त का पान करना, शिव का अन्धक को अपने त्रिशूल में पिरोना और युद्ध की समाप्ति"
7 Minuten
"विष्णु द्वारा तुलसी के शील-हरण का वर्णन, कुपित हुई तुलसी द्वारा विष्णु को शाप देना, शम्भू द्वारा तुलसी और शालग्राम - शिला के माहात्म्य का वर्णन"
16 Minuten
देवताओं और दानवों का युद्ध, शंखचूड के साथ वीरभद्र का संग्राम, पुनः उसके साथ भद्रकाली का भयंकर युद्ध करना और आकाशवाणी सुन कर निवृत्त होना, शिवजी का शंखचूड के साथ युद्ध और आकाशवाणी सुन कर युद्ध से निवृत्त हो विष्णु को प्रेरित करना, विष्णु द्वारा शंखचूड के कवच और तुलसी के शील का अपहरण, फिर रुद्र के हाथों त्रिशूल द्वारा शंखचूड का वध, शंख की उत्पत्ति का कथन
15 Minuten
"देवताओं का रुद्र के पास जाकर अपना दुःख निवेदन करना, रुद्र द्वारा उन्हें आश्वासन और चित्ररथ को शंखचूड के पास भेजना, चित्ररथ के लौटने पर रुद्र का गणों, पुत्रों और भद्रकाली सहित युद्ध के लिये प्रस्थान, उधर शंखचूड का सेना सहित पुष्पभद्रा के तट पर पड़ाव डालना तथा दानव राज के दूत और शिव की बातचीत"
12 Minuten
शंखचूड का असुरराज्य पर अभिषेक और उसके द्वारा देवों का अधिकार छीना जाना, देवों का ब्रह्मा की शरण में जाना, ब्रह्मा का उन्हें साथ लेकर विष्णु के पास जाना, विष्णु द्वारा शंखचूड के जन्म का रहस्योद्घाटन और फिर सब का शिव के पास जाना और शिव-सभा में उनकी झाकी करना तथा अपना अभिप्राय प्रकट करना
15 Minuten
दम्भ की तपस्या और विष्णु द्वारा उसे पुत्रप्राप्ति का वरदान, शंखचूड का जन्म, तप और उसे वर प्राप्ति, ब्रह्माजी की आज्ञा से उसका पुष्कर में तुलसी के पास आना और उसके साथ वार्तालाप, ब्रह्माजी का पुनः वहाँ प्रकट होकर दोनों को आशीर्वाद देना और शंखचूड का गान्धर्व विवाह की विधि से तुलसी का पाणि-ग्रहण करना
8 Minuten
देवों के स्तवन से शिवजी का कोप शान्त होना और शिवजी का उन्हें वर देना, मय दानव का शिवजी के समीप आना और उनसे वर-याचना करना, शिवजी से वर पाकर मय का वितललोक में जाना
20 Minuten
सर्वदेवमय रथ का वर्णन, शिवजी का उस रथ पर चढ़ कर युद्ध के लिये प्रस्थान, उनका पशुपति नाम पड़ने का कारण, शिवजी द्वारा गणेश का पूजन, और त्रिपुर-दाह, मय दानव का त्रिपुर से जीवित बच निकलना
16 Minuten
देवों का शिवजी के पास जाकर उनका स्तवन करना, शिवजी के त्रिपुर-वधके लिये उद्यत न होने पर ब्रह्मा और विष्णु का उन्हें समझाना, विष्णु के बतलाये हुए शिव-मन्त्र का देवों द्वारा तथा विष्णु द्वारा जप, शिवजी की प्रसन्नता और उनके लिये विश्वकर्मा द्वारा सर्वदेवमय रथ का निर्माण
6 Minuten
तारक पुत्रों के प्रभाव से संतप्त हुए देवों की ब्रह्मा के पास करुण पुकार, ब्रह्मा का उन्हें शिव के पास भेजना, शिव की आज्ञा से देवों का विष्णु की शरणमें जाना और विष्णु का उन दैत्यों को मोहित करके उन्हें आचारभ्रष्ट करना I
12 Minuten
तारकपुत्र तारकाक्ष, विद्युन्माली और कमलाक्ष की तपस्या, ब्रह्मा द्वारा उन्हें वर-प्रदान, मय द्वारा उनके लिये तीन पुरों का निर्माण और उनकी सजावट-शोभा का वर्णन
14 Minuten
"स्वामि कार्तिक और गणेश की बाल-लीला, दोनों का परस्पर विवाह के विषय में विवाद, शिवजी द्वारा पृथ्वी परिक्रमा का आदेश, कार्तिकेय का प्रस्थान, गणेश का माता-पिता की परिक्रमा करके उनसे पृथ्वी- परिक्रमा स्वीकृत कराना, विश्वरूप की सिद्धि और बुद्धि नामक दोनों कन्याओं के साथ गणेश का विवाह और उनसे क्षेम तथा लाभ नामक दो पुत्रों की उत्पत्ति, कुमार का पृथ्वी-परिक्रमा करके लौटना और क्षुब्ध होकर क्रौंचपर्वत पर चला जाना, कुमारखण्ड के श्रवण की महिमा"
13 Minuten
"पार्वती द्वारा गणेश जी को वरदान, देवों द्वारा उन्हें अग्रपूज्य माना जाना, शिवजी द्वारा गणेश को सर्वाध्यक्ष-पद प्रदान और गणेश-चतुर्थी व्रत का वर्णन, तत्पश्चात् सभी देवताओं का उनकी स्तुति करके हर्षपूर्वक अपने-अपने स्थान को लौट जाना"
16 Minuten
"शिवा का अपनी मैल से गणेश को उत्पन्न करके द्वारपाल-पद पर नियुक्त करना, गणेश द्वारा शिव जीके रोके जाने पर उनका शिवगणों के साथ भयंकर संग्राम, शिवजी द्वारा गणेश का शिरश्छेदन, कुपित हुई शिवा का शक्तियों को उत्पन्न करना और उनके द्वारा प्रलय मचाया जाना, देवताओं और ऋषियों का स्तवन द्वारा पार्वती को प्रसन्न करना, उनके द्वारा पुत्र को जिलाये जाने की बात कही जाने पर शिवजी के आज्ञानुसार हाथी का सिर लाया जाना और उसे गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें जीवित करना"
11 Minuten
"ब्रह्माजी की आज्ञा से कुमार का युद्ध के लिये जाना, तारक के साथ उनका भीषण संग्राम और उनके द्वारा तारक का वध, तत्पश्चात् देवों द्वारा कुमार का अभिनन्दन और स्तवन, कुमार का उ्हें वरदान देकर कैलास पर जा शिव-पार्वती के पास निवास करना"