Sampurn Shiv Puran Archiv
261 Episoden
20 Minuten
"संन्यासग्रहण की शास्त्रीय विधि -गणपति- पूजन, होम, तत्त्व- शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदि का प्रकार"
20 Minuten
"प्रणव के वाच्यार्थ रूप सदाशिव के स्वरूप का ध्यान, वर्णाश्रम-धर्म के पालन का महत्त्व, ज्ञानमयी पूजा, संन्यास के पूर्वांगभूत नान्दीश्राद्ध एवं ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन"
12 Minuten
"ऋषियों का सूतजी से तथा वामदेव जी का स्कन्द से प्रश्न, एवं प्रणवार्थ-निरूपण के लिये अनुरोध"
14 Minuten
"देवी के क्रिया-योग का वर्णन, देवी की मूर्ति एवं मंदिर के निर्माण, स्थापन, और पूजन का महत्त्व, परा अम्बा की श्रेष्ठता, विभिन्न मासों और तिथियों में देवी के व्रत, उत्सव और पूजन आदि के फल तथा इस संहिता के श्रवण एवं पाठ की महिमा"
10 Minuten
"देवी के द्वारा दुर्गमासुर का वध तथा उनके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नाम पड़ने का कारण"
8 Minuten
"देवताओं का गर्व दूर करने के लिये तेजःपुंज रूपिणी उमा का प्रादुर्भाव"
9 Minuten
"देवी के द्वारा सेना और सेनापतियों सहित निशुम्भ एवं शुम्भ का संहार "
11 Minuten
"देवी उमा के शरीर से सरस्वती का आविर्भाव, उनके रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना, दूत के निराश लौटने पर शुम्भ का क्रमशः धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड तथा रक्तबीज को भेजना और देवी के द्वारा उन सबका मारा जाना"
9 Minuten
"सम्पूर्ण देवताओं के तेज से देवी का महालक्ष्मी रूप में अवतार और उनके द्वारा महिषासुर का वध"
12 Minuten
"भगवती उमा के कालिका-अवतार की कथा, समाधि और सुरथ के समक्ष मेधा का देवी की कृपा से मधुकैटभ के वध का प्रसंग सुनाना"
8 Minuten
काल या मृत्यु को जीतकर अमरत्व प्राप्त करने की चार यौगिक साधनाएँ - प्राणायाम, भ्रूमध्य में अग्नि का ध्यान, मुख से वायुपान तथा मुड़ी हुई जिह्वा द्वारा गले की घाँटी का स्पर्श
10 Minuten
"काल को जीतने का उपाय, नवधा शब्दब्रह्म एवं तुंकार के अनुसंधान और उससे प्राप्त होने वाली सिद्धियों का वर्णन"
6 Minuten
"मृत्युकाल निकट आने के कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन"
13 Minuten
"वेद और पुराणों के स्वाध्याय तथा विविध प्रकार के दान की महिमा,नरकों का वर्णन तथा उनमें गिराने वाले पापों का दिग्दर्शन,पापों के लिये सर्वोत्तम प्रायश्चित्त शिवस्मरण तथा ज्ञान के महत्त्व का प्रतिपादन"
7 Minuten
"जलदान, जलाशय-निर्माण, वृक्षारोपण, सत्यभाषण और तप की महिमा"