Sampurn Shiv Puran Archiv
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"महादेव जी के शरीर से देवी का प्राकट्य और देवी के भ्रूमध्य-भाग से शक्ति का प्रादुर्भाव"
8 Minuten
"ब्रह्माजी के द्वारा अर्द्धनारीश्वर रूप की स्तुति तथा उस स्त्रोत की महिमा"
8 Minuten
"भगवान् रुद्र के ब्रह्माजी के मुख से प्रकट होने का रहस्य, रुद्र के महामहिम स्वरूप का वर्णन, उनके द्वारा रुद्रगणों की सृष्टि तथा ब्रह्माजी के रोकने से उनका सृष्टि से विरत होना"
12 Minuten
"ब्रह्माजी की मूर्छा, उनके मुख से रुद्रदेव का प्राकट्य, सप्राण हुए ब्रह्माजी के द्वारा आठ नामों से महेश्वर की स्तुति तथा रुद्र की आज्ञा से ब्रह्मा द्वारा सृष्टि-रचना"
10 Minuten
"महेश्वर की महत्ता का प्रतिपादन"
14 Minuten
"नैमिषारग्य में दीर्घसत्र के अन्त में मुनियों के पास वायुदेवता का आगमन, उनका सत्कार तथा ऋषियों के पूछने पर वायु के द्वारा पशु, पाश एवं पशुपति का तात्त्विक विवेचन"
12 Minuten
"ब्रह्माजी के द्वारा परमतत्त्व के रूप में भगवान् शिव की ही महत्ता का प्रतिपान, उनकी कृपा को ही सब साधनों का फल बताना तथा उनकी आज्ञा से सब मुनियों का नैमिषारण्य में आना"
7 Minuten
"ऋषियों का ब्रह्माजी के पास जा उनकी स्तुति कर के उनसे परम पुरुष के विषय में प्रश्न करना और ब्रह्माजी का आनन्दमग्न हो ‘रुद्र’ कहकर उत्तर देना"
10 Minuten
प्रयाग में ऋषियों द्वारा सम्मानित सूतजी के द्वारा कथा का आरम्भ, विद्यास्थानों एवं पुराणों का परिचय तथा वायु संहिता का प्रारम्भ
9 Minuten
"यति के द्वादशाह-कृत्य का वर्णन,स्कन्द और वामदेव का कैलास पर्वत पर जाना तथा सूतजी के द्वारा इस संहिता का उपसंहार"
10 Minuten
"यति के लिये एकादशाह-कृत्य का वर्णन"
12 Minuten
"यति के अन्त्येष्टि कर्म की दशाहपर्यन्त विधि का वर्णन"
204. Kailash Samhita - Adhyay 17, 18 & 19 ; कैलाश संहिता - "सत्रहवाँ, अठारहवाँ एवं उन्नीसवाँ अध्याय"
16 Minuten
"महावाक्यों के अर्थपर विचार तथा संन्यासियों के योगपट्ट का प्रकार"
17 Minuten
"शैवदर्शन के अनुसार शिवत्त्व, जगत्-प्रपंच और जीवतत्त्व के विषय में विशद विवेचन तथा शिव से जीव और जगत्की अभिन्नता का प्रतिपादन"
9 Minuten
"प्रणव के अर्थों का वर्णन"