Sampurn Shiv Puran Archiv
261 Episoden
18 Minuten
"शिव और शिवा की विभूतियों का वर्णन"
7 Minuten
"भगवान् शिव की ब्रह्मा आदि पंचमूर्तियों, ईशानादि ब्रह्ममूर्तियों तथा पृथ्वी एवं शर्व आदि अष्टमूर्तियों का परिचय और उनकी सर्वव्यापकता का वर्णन"
8 Minuten
"उपमन्यु द्वारा श्रीकृष्ण को पाशुपत ज्ञान का उपदेश"
6 Minuten
"ऋषियों के पूछने पर वायुदेव का श्रीकृष्ण और उपमन्यु के मिलन का प्रसंग सुनाना, श्रीकृष्ण को उपमन्यु से ज्ञान का और भगवान् शंकर से पुत्र का लाभ"
11 Minuten
"भगवान् शंकर का इन्द्ररूप धारण कर के उपमन्यु के भक्तिभाव की परीक्षा लेना, उन्हें क्षीरसागर आदि देकर बहुत से वर देना और अपना पुत्र मान कर पार्वती के हाथ में सौंपना, कृतार्थ हुए उपमन्यु का अपनी माता के स्थान पर लौटना"
9 Minuten
"बालक उपमन्यु को दूध के लिये दु:खी देख माता का उसे शिव की तथा उपमन्यु की तीव्र तपस्या"
19 Minuten
"पाशुपत-व्रत की विधि और महिमा तथा भस्मधारण की महत्ता"
13 Minuten
"परम धर्म का प्रतिपादन, शैवागम के अनुसार पाशुपत ज्ञान तथा उसके साधनों का वर्णन"
15 Minuten
"ऋषियों के प्रश्न का उत्तर देते हुए वायुदेव के द्वारा शिव के स्वतन्त्र एवं सर्वानुग्राहक स्वरूप का प्रतिपादन"
8 Minuten
"जगत् ‘वाणी और अर्थ रूप’ है - इसका प्रतिपादन"
5 Minuten
अग्नि और सोम के स्वरूपका विवेचन तथा जगत की अग्नीषोमात्मकता का प्रतिपादन
8 Minuten
"मन्दराचल पर गौरी देवी का स्वागत, महादेवजी के द्वारा उनके और अपने उत्कृष्ट स्वरूप एवं अविच्छेद्य सम्बन्ध पर प्रकाश तथा देवी के साथ आये हुए व्याघ्र को उनका गणाध्यक्ष बना कर अन्तःपुर के द्वार पर सोमनन्दी नाम से प्रतिष्ठित करना"
6 Minuten
"गौरी देवी का व्याघ्र को अपने साथ ले जाने के लिये ब्रह्माजी से आज्ञा माँगना, ब्रह्माजी का उसे दुष्कर्मी बता कर रोकना, देवी का शरणागत को त्यागने से इनकार करना, ब्रह्माजी का देवी की महत्ता बता कर अनुमति देना, और देवी का माता- पिता से मिल कर मन्दराचल को जाना"
10 Minuten
"पार्वती की तपस्या, एक व्याघ्र पर उनकी कृपा, ब्रह्माजी का उनके पास आना, देवी के साथ उनका वार्तालाप, देवी के द्वारा काली त्वचा का त्याग और उससे कृष्णवर्णा कुमारी कन्या के रूप में उत्पन्न हुई कौशिकी के द्वारा शुम्भ-निशुम्भ का वध"
10 Minuten
"भगवान् शिव का पार्वती तथा पार्षदों के साथ मन्दराचल पर जाकर रहना, शुम्भ निशुम्भ के वध के लिये ब्रह्माजी की प्रार्थना से शिव का पार्वती को 'काली’ कहकर कुपित करना और काली का ‘गौरी’ होने के लिये तपस्या के निमित्त जाने की आज्ञा माँगना"