Sampurn Shiv Puran Archiv
261 Episoden
11 Minuten
"देवताओं द्वारा स्कन्द का शिव-पार्वती के पास लाया जाना, उनका लाड़-प्यार, देवों के माँगने पर शिवजी का उन्हें तारक- वध के लिये स्वामी कार्तिक को देना, कुमार की अध्यक्षता में देव – सेना का प्रस्थान, महीसागर-संगम पर तारकासुर का आना और दोनों सेनाओं में मुठभेड़, वीरभद्र का तारक के साथ घोर संग्राम, पुनः श्रीहरि और तारक में भयानक युद्ध"
8 Minuten
शिव-पार्वती तथा उनकी बारात की विदाई, भगवान् शिव का समस्त देवताओं को विदा करके कैलास पर रहना और पार्वती-खण्ड के श्रवण की महिमा"
16 Minuten
"मेना की इच्छा के अनुसार एक ब्राह्मण-पत्नी का पार्वती को पति-व्रत धर्म का उपदेश देना"
5 Minuten
चतुर्थीकर्म, बारात का कई दिनों तक ठहरना, सप्तर्षियों के समझाने से हिमालय का बारात को विदा करने के लिये राजी होना, मेना का शिव को अपनी कन्या सौंपना तथा बारात का पुरी के बाहर जाकर ठहरना"
6 Minuten
"रात को परम सुन्दर सजे हुए वास-गृह में शयन कर के प्रात:काल
भगवान् शिव का जन-वासे में आगमन"
भगवान् शिव का जन-वासे में आगमन"
11 Minuten
"शिव के विवाह का उपसंहार, उनके द्वारा दक्षिणा-वितरण, वर-वधू का कोहबर और वास-भवन में जाना, वहाँ स्त्रियों का उनसे लोकाचार का पालन कराना, रति की प्रार्थना से शिव द्वारा काम को जीवन-दान एवं वर-प्रदान, वर-वधू का एक-दूसरे को मिष्टान्न भोजन"
9 Minuten
"शिव-पार्वती के विवाह का आरम्भ, हिमालय के द्वारा शिव के गोत्र के
विषय में प्रश्न होने पर नारद जी के द्वारा उत्तर हिमालय का कन्यादान
कर के शिव को दहेज देना तथा शिवा का अभिषेक"
विषय में प्रश्न होने पर नारद जी के द्वारा उत्तर हिमालय का कन्यादान
कर के शिव को दहेज देना तथा शिवा का अभिषेक"
7 Minuten
"वर पक्षके आभूषणों से विभूषित शिवा की नीराजना, कन्या-दानके समय
वर के साथ सब देवताओं का हिमाचल के घर के आँगन में
विराजना तथा वर-वधू के द्वारा एक-दूसरे का पूजन"
वर के साथ सब देवताओं का हिमाचल के घर के आँगन में
विराजना तथा वर-वधू के द्वारा एक-दूसरे का पूजन"
8 Minuten
"मेना द्वारा द्वार पर भगवान् शिव का परिच्छन, उनके रूप को देख कर संतोष का अनुभव, अन्यान्य युवतियों द्वारा वर की प्रशंसा, पार्वती का अम्बिका- पूजन के लिये बाहर निकलना तथा देवताओं और भगवान् शिव का उनके सुन्दर रूप को देख कर प्रसन्न होना"
7 Minuten
"भगवान् शिव का अपने परम सुन्दर दिव्य रूप को प्रकट करना, मेना की
प्रसन्नता और क्षमा-प्रार्थना तथा पुरवासिनी स्त्रियों का शिव के रूप का दर्शन कर के जन्म और जीवन को सफल मानना"
प्रसन्नता और क्षमा-प्रार्थना तथा पुरवासिनी स्त्रियों का शिव के रूप का दर्शन कर के जन्म और जीवन को सफल मानना"
14 Minuten
"मेना का विलाप, शिव के साथ कन्या का विवाह न करने का हठ, देवताओं
तथा श्रीविष्णु का उन्हें समझाना तथा उनका सुन्दर रूप धारण
करने पर ही शिव को कन्या देने का विचार प्रकट करना"
तथा श्रीविष्णु का उन्हें समझाना तथा उनका सुन्दर रूप धारण
करने पर ही शिव को कन्या देने का विचार प्रकट करना"
14 Minuten
"हिमवान द्वारा शिव की बारात की अगवानी तथा सबका अभिनन्दन एवं
वन्दन, मेना का नारद जी को बुलाकर उनसे बारातियों का परिचय पाना
तथा शिव और उनके गणों को देखकर भय से मूर्च्छित होना"
वन्दन, मेना का नारद जी को बुलाकर उनसे बारातियों का परिचय पाना
तथा शिव और उनके गणों को देखकर भय से मूर्च्छित होना"
7 Minuten
"भगवान शिव का बारात लेकर हिमालय पूरी की ओर प्रस्थान"
10 Minuten
'भगवान शिव का नारद जी के द्वारा सब देवताओं को निमंत्रण दिलवाना , सबका आगमन तथा शिव का मंगलाचार एवं ग्रह-पूजन आदि कर के कैलाश से बहार निकलना'
15 Minuten
हिमवान का भगवान् शिव के पास लग्न-पत्रिका भेजना, विवाह के लिये आवश्यक सामान जुटाना, मंगलाचार का आरम्भ करना, उनका निमन्त्रण पाकर पर्वतों और नदियोंका दिव्यरूपमें आना, पुरी की सजावट तथा विश्वकर्मा द्वारा दिव्य-मण्डप एवं देवताओं के निवास के लिये दिव्य-लोकोंका निर्माण करवाना