Sampurn Shiv Puran Archiv
261 Episoden
13 Minuten
"पार्थिव पूजा की महिमा, शिवनैवैद्यभक्षण के विषय में निर्णय तथा बिल्व का महात्म्य"
15 Minuten
"पार्थिव लिंग के निर्माण की रीति तथा वेद मंत्रों द्वारा उसके पूजन की विस्तरित एवं संक्षिप्त विधि का वर्णन"
21 Minuten
"बंधन और मोक्ष का विवेचन, शिवपूजा का उपदेश, लिंग आदि में शिवपूजन का विधान, भस्म के स्वरूप का निरूपण और महतव, शिव एवं गुरु शब्द की व्युत्पत्ति तथा शिव के भस्मधारण का रहस्य"
10 Minuten
"षडलिंग स्वरूप प्रणव का महात्म्य, उसके सूक्ष्म रूप (ओंकार) एवं स्थूलरूप (पंचाक्षर) मंत्र का विवेचन, उसके जप की विधि एवं महिमा, कार्यब्रह्म के लोकों से लेकर कIरण-रुद्र तक के लोकों का विवेचन करके कIलातीत, पंचIवर्णविशेष शिवलोक के अनिवर्चनीय वैभैव का निरूपण तथा शिव भक्तों के सत्कार की महत्ता"
21 Minuten
पृथ्वी आदि से निर्मित देव प्रतिमाओं के पूजन की विधि, उनके लिए नैवैद्य का विचार, पूजन के विविध उपचारों का फल, विशेष मास, वार, तिथि एवं नक्षत्रों के योग में पूजन का विशेष फल, तथा लिंग के वैज्ञानिक स्वरूप का विवेचन"
11 Minuten
देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार"
11 Minuten
"अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन, भगवान शिव के द्वारI सातों वारो का निर्माण तथा उनमे देवाराधन से विभिन्न प्रकार के फल की प्राप्ति का कथन"
19 Minuten
"सदाचार, शौचाचार, स्नान, भस्म-धारण, संध्यावंदन, प्रणव जाप, गायत्री जाप, दान, न्यायतः धनोपार्जन तथा अग्निहोत्र आदि की विधि एवं पूजा का महत्व"
9 Minuten
"मोक्षदायक पुण्य क्षेत्रों का वर्णन, काल विशेष में विभिन्न नदियों के जल में स्नान के उत्तम फल का निर्देश तथा तीर्थों में पाप से बचे रहने की चेतना"
16 Minuten
"शिव लिंग की स्थापना, उसके लक्षण और पूजन की विधि का वर्णन तथा शिव पद की प्राप्ति करने वाले सत्कर्मो का विवेचन"
9 Minuten
पाँच कृत्यों का प्रतिपादन, प्रणव एवं पंचाक्षर अक्षरों की महत्ता, ब्रह्मा और विष्णु द्वार शिव जी की स्तुति तथा उनका अंतर्धान होना
7 Minuten
"महेश्वर का ब्रह्मा तथा विष्णु को अपने निष्कल या सकल रूप का परिचय देते हुए लिंग पूजन का महत्व बताना"
6 Minuten
भगवान शिव के लिंग एवं साकार विग्रह की पूजा के रहस्य तथा महत्व का वर्णन
8 Minuten
साध्य साधन आदि का विचार तथा श्रवण, कीर्तन और मनन, इन तीन साधनो की श्रेष्ठता का प्रतिपादन!
5 Minuten
"शिव पुराण का परिचय और महिमा"