Sampurn Shiv Puran Archiv
261 Episoden
10 Minuten
"विभिन्न पुष्पो, अन्नो, तथा जल आदि की धIराओं से शिव जी की पूजा का महात्म्य"
16 Minuten
"शिव पूजन की सर्वोत्तम विधि का वर्णन"
9 Minuten
"भगवान शिव की श्रेष्ठता तथा उनके पूजन की अनिवार्य आवश्यकता का प्रतिपादन"
16 Minuten
"शिव पूजन की विधि तथा फल प्राप्ति"
4 Minuten
"श्री हरि को सृष्टि का भार एवं भोग-मोक्ष-दान का अधिकार दे भगवान शिव का अंतर्धान होना"
11 Minuten
"उमा सहित भगवान शिव का प्रIकट्य, उनके द्वारा अपने स्वरूप का विवेचन तथा ब्रह्मा आदि तीनो देवताओं की एकता का प्रतिपादन"
10 Minuten
"ब्रह्मा और विष्णु को भगवान शिव के शब्दमय शरीर का दर्शन"
6 Minuten
"भगवान विष्णु की नाभि से कमल का प्रादुर्भाव, शिवेच्छावश ब्रह्मा जी का उससे प्रकट होना, कमल नाल के उदगम का पता लगाने में असमर्थ ब्रह्मा का तप करना, श्री हरि का उन्हें दर्शन देना, विवादग्रस्त ब्रह्मा-विष्णु के बीच में अग्नि-स्तंभ का प्रकट होना तथा उसके और-छोर का पता ना पाकर उन दोनो का उसे प्रणाम करना"
12 Minuten
"महाप्रलयकाल में केवल सदब्रह्म की सत्ता का प्रतिपादन, उस निर्गुण - निराकार ब्रह्म से ईश्वर मूर्ति (सदाशिव) का प्राकट्य, सदाशिव द्वारI स्वरूपभूतI शक्ति (अम्बिका) का प्रकटीकरण, उन दोनों के द्वारI उत्तम क्षेत्र (काशी या आनंदवन) का प्रादुर्भाव, शिव के वामांग से परम पुरुष (विष्णु) का अविर्भाव तथा उनके सकाश से प्राकृत तत्त्वों की क्रमश: उत्पत्ति का वर्णन"
6 Minuten
"नारद जी का शिवतीर्थों में भ्रमण, शिव गणों को श्रापौद्धIर की बात बताना तथा ब्रह्मलोक में जाकर ब्रह्मा जी से शिवतत्व के विषय में प्रश्न करना"
10 Minuten
"नारद जी का भगवान विष्णु को क्रोधपूर्वक फटकारना और श्राप देना; फिर माया के दूर हो जाने पश्चाताप पूर्वक भगवान के चरणों में गिरना और शुद्धि का उपाय पूछना तथा भगवान विष्णु का उन्हें समझा बुझा कर शिव का महात्म्य जानने के लिए ब्रह्मा जी के पास जाने का आदेश और शिव के भजन का उपदेश देना"
10 Minuten
"माया निर्मित नगर में शीलनिधि की कन्या पर मोहित हुए नारद जी का भगवान विष्णु से उनका रूप मांगना, भगवान का अपने रूप के साथ उन्हें वानर का सा मुंह देना, कन्या का भगवान को वरण करना और कुपित हुए नारद का शिवगणों को श्राप देना"
15 Minuten
"ऋषियों के प्रश्न के उत्तर में नारद - ब्रह्म संवाद की अवतारणा करते हुए सूतजी का उन्हें नारद मोह का प्रसंग सुनाना; कामविजय के गर्व से युक्त हुए नारद का शिव, ब्रह्मा तथा विष्णु के पास जाकर अपने तप का प्रभाव बताना"
15 Minuten
"रुद्राक्ष धारण की महिमा तथा उसके विविध भेदों का वर्णन"
15 Minuten
"शिवनाम जप तथा भस्मधारण की महिमा, त्रिपुंड के देवता और स्थान आदि का प्रतिपादन"